इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के नाम के आगे माननीय नहीं लिखे जाने के मामले में कड़ा एतराज जताने के बाद फिर एक ऐतिहासिक और कड़ा निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधान परिषद के सदस्यों के नाम के सामने माननीय लिखा जाना चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रियों के नाम के सामने भी माननीय शब्द लिखना चाहिए।
कोर्ट के निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के जजेस भी शामिल
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजेस भी इस सम्मानजनक उपाधि के हकदार हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा- किसी भी पद के सरकारी कर्मचारी को इस विशिष्ट उपाधि से नहीं नवाजा जा सकता।
यह बड़ा निर्देश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने पहली भी जताई थी नाराजगी
बता दें कि एक महीने पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई थी। मामला मथुरा जनपद में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें एक केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय’ या ‘श्री’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) से शपथपत्र के जरिए स्पष्टीकरण तलब किया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भले ही शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में मंत्री के बारे में अनुचित या असम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया हो, लेकिन एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस का दायित्व है कि वह सरकारी प्रोटोकॉल का पालन करे और सम्मानजनक संबोधन जोड़े।
क्या था मामला
यह टिप्पणी उस समय आई थी जब कोर्ट मथुरा के हाईवे थाने में दर्ज एक मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग पर सुनवाई कर रहा था। शिकायत के अनुसार, आरोप है कि हर्षित शर्मा ने एक केंद्रीय मंत्री से नजदीकी संबंध होने का दावा करते हुए लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इस बहाने करीब 80 लाख रुपये की ठगी की
हाईकोर्ट ने कहा था कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में न केवल तथ्यों की शुद्धता बल्कि भाषा और प्रोटोकॉल का पालन भी उतना ही आवश्यक है। और 5 मई को उच्च न्यायालय ने अपने निर्देश में साफ कर दिया है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जैसे राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रियों और सर्वोच्च न्यायालय के जजेस के नाम के आगे माननीय लिखे जाने का प्रोटोकॉल की तरह पालन किया जाए।
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